बुलेट प्रूफ जैकेट्स की कमी से जूझ रही सेना

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नई दिल्ली : भारतीय सेना के जवान और अफसर बुलेट प्रूफ जैकेट्स की कमी से जूझ रहे हैं। भारतीय सेना दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना है लेकिन इसके बावजूद हमारी सेना के पास लाइफ सेविंग जैकेट्स की कमी है। हालांकि सरकार का कहना है कि अभी सेना के पास पर्याप्त जैकेट्स हैं लेकिन वह यह भी मानती है कि अगले साल तक ये जैकेट्स एक्सपायर्ड हो जाएंगी।
6 सालों में पूरी नहीं हो पाई मांग
सेना को ये जैकेट्स उपलब्ध कराने का काम कितनी लचर है इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2009 में 1,86,138 जैकेट्स की मांग सेना की ओर से की गई थी लेकिन लगभग 6 साल बीत जाने के बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं किया जा सका है। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि 2012 में इन लाइफ जैकेट्स की मांग का आंकड़ा साढ़े तीन लाख से ऊपर पहुंच गया। सवाल यह है कि जब 2009 की मांग ही पूरी नहीं हो पाई तो 2012 की मांग के बारे में सरकार क्या करेगी। साल 2009 में यूपीए शासनकाल के दौरान सैन्य खरीद के लिए जिम्मेदार संगठन डीएसी ने खुद इन जैकेट्स को खरीदने की अनुशंसा की थी। 2009 के बाद यूपीए एक बार फिर सत्ता में आई लेकिन फिर भी जैकेट्स की खरीद नहीं हो पाई। अब मोदी सरकार सत्ता में है लेकिन अब भी इन्हें खरीदा नहीं जा सका है।
प्रपोजल मंगाए पर फैसला नहीं
अब सेना की इस जरूरत पर फैसला करने का अधिकार संसदीय समिति के पास है जिसका नेतृत्व बीजेपी सांसद मेजर जनरल बीसी खंडूरी (रिटायर्ड) कर रहे हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में जैकेट्स मिलने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। समिति ने सरकार से दो महीने के भीतर इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी है। वैसे, सच यह भी है कि साल 2009 में डीएसी स्वीकृति के बाद रक्षा मंत्रालय ने 39 वेंडर्स से बातचीत की थी लेकिन केवल छह ने ही इन जैकेट्स की सप्लाई पर सकारात्मक रुख दिखाया। सेना ने उम्मीद जताई है कि बुलेट प्रूफ जैकेट्स की आपूर्ति जल्द ही की जा सकेगी। एक जैकेट की कीमत करीब 50 हजार रुपए है।
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