व्यापमं घोटाला: राज्यपाल के खिलाफ STF ने दर्ज की FIR

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नई दिल्ली. व्यापमं घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ ने मध्य प्रदेश के गवर्नर रामनरेश यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक राज्यपाल के खिलाफ यह मुकदमा भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत दर्ज किया गया है। हालांकि, एसटीएफ की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने की औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है। इससे पहले मोदी कैबिनेट में केंद्रीय सामाजिक अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने उज्जैन में दावा किया था कि राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई की इजाजत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एसआईटी को दी है। बेटा और ओएसडी भी हैं आरोपी व्यापमं घोटाले में राज्यपाल के बेटे शैलेश यादव का नाम चार्जशीट में आने के बाद एसआईटी ने 'अतिविशिष्ट' के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए इजाजत मांगी थी। गौरतलब है कि इस मामले में राज्यपाल के बेटे शैलेश यादव का नाम चार्जशीट में है। इसके साथ ही राज्यपाल के ओएसडी धनराज यादव भी घोटाले के आरोपी हैं। क्या हैं आरोप - व्यापमं घोटाले में राज्यपाल रामनरेश यादव के पुत्र शैलेष यादव पर संविदा शिक्षक पद के 10 आवेदकों से पैसे लेकर पास कराने का आरोप है। इस परीक्षा को व्यापमं ही आयोजित कराता है। पिछले हफ्ते इस मामले में एसटीएफ ने शैलेष से पूछताछ के लिए राजभवन को नोटिस भेजा था। राजभवन की तरफ से इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया और शैलेष के बचाव में खड़ा नजर आया। - घोटाले की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अपनी चार्जशीट में रामनरेश यादव के बेटे शैलेष यादव का उल्लेख किया है। इस मामले में पहले एसटीएफ का एक अधिकारी खुद नोटिस लेकर राजभवन गया था लेकिन किसी ने नोटिस नहीं लिया तो फिर डाक से नोटिस तामील कराया गया। - इससे पहले उनके ओएसडी धनराज यादव को भी इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। - एसटीएफ के शैलेष यादव को पूछताछ के लिए बुलाने के लिए भेजे गए नोटिस के बाद से ही राज्यपाल की मुश्किलें बढ़ने लगी थी। - मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। यादव को 2011 में केंद्र की यूपीए सरकार ने मध्यप्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया था। एसआईटी ने मांगी थी इजाजत व्यापमं घोटाले में एसआईटी ने राज्यपाल को भी पहली नजर में दोषी पाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति हाईकोर्ट से मांगी थी। हाईकोर्ट ने इसके लिए एसआईटी को अनुमति दे दी थी। दिग्विजय ने एसआईटी को सौंपे कुछ और सबूत कुछ दिनों पहले एसआईटी पर एक्सल शीट में से कुछ नाम हटाए जाने और सीएम की जगह राजभवन और उमा भारती का नाम जोड़े जाने का खुलासा करने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आज भी एसआईटी को इस मामले में कुछ सबूत सौंपे हैं। दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने एसआईटी को कुछ टेलीफोन नंबरों की सूची सौंपी है। बताया जा रहा है कि ये नंबर आरोपियों के हैं, जिन पर सीएम ऑफिस से बातचीत हुई है। क्या है व्यापमं घोटाला? व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) मध्य प्रदेश में उन प्रतियोगी व्यावसायिक परीक्षाओं का आयोजन कराता है, जिन्हें मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग नहीं कराता है। व्यापमं घोटाले में आरोप है कि कम्प्यूटर सूची में हेराफेरी करके अनुचित तरीके से अयोग्य लोगों को भर्ती कराया गया। व्यापमं के माध्यम से संविदा शिक्षक वर्ग-1 और वर्ग-2 के अलावा कॉन्स्टेबल, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी व नापतौल निरीक्षक की भर्तियां गलत तरीके से की गईं। व्यापमं की करीब 1000 भर्तियों को संदिग्ध माना गया है। इनकी जांच की जा रही है। इस मामले में कई बड़े पदों पर बैठे लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आईपीएस अधिकारी आरके शिवहरे को गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी बेटी नेहा को प्री-पीजी मेडिकल में अनुचित तरीके से भर्ती कराया था। पीएमटी परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में अरबिंदो मेडिकल कॉलेज के विनोद भंडारी को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और उनके ओएसडी ओपी शुक्ला गिरफ्तार किए जा चुके हैं। यह मामला करीब 2013 में उछला था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की निगरानी में अब एसटीएफ इसकी जांच कर रहा है।
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