पहली बार गांवों में होगी पूरी पढ़ी-लिखी सरकार

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जयपुर: शिक्षा की अनिवार्यता ने पंचायती राज संस्थाओं का सियासी चेहरा बदल दिया है। प्रदेश में पहली बार सभी जनप्रतिनिधि पढ़े-लिखे तो हैं ही, डॉक्टर, इंजीनियर, एमबीए और लॉ करने वाले युवा भी पंच-सरपंच चुने गए हैं। इस बार पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में 7 से 9 फीसदी तक प्रोफेशनल्स और 45 फीसदी से ज्यादा ग्रेजुएट व पीजी है। इनके परिणाम 5 फरवरी को आएंगे।  
रोचक नजारे
कांग्रेस सरकार में पंचायती राज मंत्री रहे भरतसिंह इस बार पंच बने, पत्नी सरपंच।
 7 पंचायतों में इस बार 8वीं पास प्रत्याशी नहीं मिले। इस कारण चुनाव नहीं हुए।
 2010 58% जनप्रतिनिधि 8वीं तक पढ़े-लिखे थे, प्रोफेशनल 0.1% थे।
 इस बार 45% ग्रेजुएट, पीजी। प्रोफेशनल जनप्रतिनिधि 8% तक।

 2010 के चुनावों में प्रदेश की 9166 पंचायतों में सिर्फ 0.1% प्रोफेशनल चुने गए थे। इस बार 100 से ज्यादा प्रोफेशनल्स सरपंच बने हैं। पिछले चुनाव में शिक्षा की अनिवार्यता नहीं थी, तब जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य तथा सरपंच चुने गए 15,452 जनप्रतिनिधियों में 6174 आठवीं पास भी नहीं थे। पिछली बार महज 94 (एक प्रतिशत) सरपंच ही एमए की डिग्रीधारी थे लेकिन इस बार इनकी तादाद 10 फीसदी से भी ज्यादा है।
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