भिखारी बना लॉ का छात्र

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जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के 48 वर्षीय स्टूडेंट शिव सिंह। दोपहर तीन बजे तक घरों, मंदिरों और दुकानों पर भीख मांगते हैं। तीन बजते ही कॉलेज कैम्पस में नजर आते हैं...हाथ में फटे हुए थैले में कुछ कॉपी-किताब के साथ।
 कॉलेज में सिर्फ पढ़ाई
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक उन्होंने कभी छुट्टी नहीं की। जिस दिन क्लास नहीं लगती, लाइब्रेरी हॉल में अकेले स्टडी करते रहते हैं। शिव को पढ़ाने वाले और साथ पढ़ने वाले छात्र कहते हैं- विश्वास ही नहीं होता कि ये व्यक्ति भीख मांगता होगा। कॉलेज में हमेशा पढ़ते हुए ही दिखाई देता है।
 हाथ खराब था, काम के लिए पढ़ना शुरू कर दिया-
मेरा भी परिवार था। मजदूरी करने के बावजूद मां-बाप ने पढ़ाया। गर्वनमेंट कॉलेज, गंगापुर सिटी से 1989 में ग्रैजुएशन की। शादी हुई, बच्चे हुए। नौकरी मिली नहीं। गांव में ठाकुरों के खेत पर मजदूरी की। पैसा नहीं दिया। मांगने पर पीटा। चोट की वजह से सीधे हाथ ने काम करना बंद कर दिया। फिर कहीं काम नहीं मिला। पत्नी, परिवार सब छोड़ गए। भूख ने हाथ फैलाने को मजबूर कर दिया।  
जब किसी से भीख मांगा, एक ताना जरूर मिला-
 जवान है, कुछ काम क्यों नहीं करता। अब कैसे कहूं कि हाथ खराब होने से मजदूरी कर ही नहीं सकता। अखबार में लॉ कॉलेज का विज्ञापन देखा। फार्म भर दिया। भीख के पैसे बचाकर किताब खरीदी। मंदिर के बाहर बैठकर पढाई की। कॉम्पिटिशन दिया और मेरिट लिस्ट में नाम आ गया। अब एक ही जिद है- पढ़ाई पूरी करूंगा। फिर कोर्ट में काम मिल ही जाएगा।
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