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दिल्ली: सन 1947 में जब भारत का विभाजन हुआ तो लाखों की संख्या में हिन्दू और मुसलमानों को धर्म के आधार पर मुल्क बदलना पड़ा...फिर भी कुछ मुसलमान ऐसे थे जो भारत में ही रह गए और इसी तरह कुछ हिन्दू पाकिस्तान में....भारत ने हिन्दू राष्ट्र बनने की बजाए धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनना पसंद किया ताकि भारत में रहने वाले मुसलमान खुद को असुरक्षित न समझें और उन्हें समान अधिकार मिलें...इसके लिए भारत ने अपने संविधान में धर्म चुनने की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों की सूची में शामिल किया भारत विभाजन से पहले मुसलमानों की संख्या भारत की कुल आबादी का 10 प्रतिशत थी जो आज बढ़कर लगभग 15 प्रतिशत हो गई है....लेकिन पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं की किस्मत भारतीय मुसलमानों जैसी न तब थी  न आज है पाकिस्तान में बसे हिन्दुओं में से लगभग 96 फीसदी सिंध प्रान्त में ही रहते हैं वर्ष 1956 में पाकिस्तान का संविधान बना और पाकिस्तान प्रगतिशील और उदारवादी विचारधाराओं को त्यागकर इस्लामिक देश बन गया  और तभी से हिन्दुओं का वहां रहना दुश्वार हो गया....पाकिस्तान जब भी भारत के आगे मुंह की खाता है या भारत में जब भी सांप्रदायिक दंगे होते, सभी घटनाओं का दुष्परिणाम पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं को भुगतना पड़ता है...चाहे वह भारत-पाक युद्ध रहा हो, या अयोध्या में विवादित ढांचे का विध्वंस, या गुजरात में हुए दंगे, पाकिस्तान के हिन्दुओं को वहां की सरकार और अवाम ने अपने गुस्से का निशाना बनाया.... भारत में 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने से पाकिस्तान में हिन्दुओं के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं...माइनॉरिटी राइट ग्रुप इंटरनेशनल के मुताबिक 2-8 दिसंबर 1992 के दौरान पाकिस्तान में तकरीबन 120 हिन्दू मंदिरों को गिराया गया....ज़िया-उल-हक की तानाशाही से लेकर अब तालिबान के अत्याचारों तक पाकिस्तानी हिन्दुओं का जीवन दूभर ही रहा है....आज़ादी के वक्त पाकिस्तान में कुल 428 मंदिर थे जिनमें से अब सिर्फ 26 ही बचे हैं... पाकिस्तान में ज़्यादातर हिन्दू मंदिर या गिरा दिए गए, या उन्हें होटल बना दिया गया है...पाकिस्तान के नेशनल कमिशन फॉर जस्टिस एंड पीस की वर्ष 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक 74 प्रतिशत हिन्दू महिलाएं यौन शोषण का शिकार होती हैं...पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में हर महीने 20 से 25 हिन्दू लड़कियों का अपहरण होता है और ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है....जब पाकिस्तान में जीने के लिए अनुकूल स्थिति नहीं रही तो मजबूरन हिन्दुओं को बड़ी संख्या में पाकिस्तान छोड़ना पड़ रहा है... 1951 में पाकिस्तान में हुई जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की कुल आबादी में 22 फीसदी हिन्दू थे जो 1998 की जनगणना में घटकर 1.6 फीसदी रह गए हैं... ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1965 से लेकर अब तक तकरीबन सवा लाख पाकिस्तानी हिन्दुओं ने भारत की तरफ पलायन किया है...भारत आने वाले हिन्दुओं का आरोप है कि उनसे बैगानों जैसा बर्ताव किया जाता है....उनकी मांग है हमें भारत में रहने दिया जाए...पाकिस्तानी हिन्दुओं पर कई बार भारतीय संसद में भी बहस हुई...पर कभी कोई ठोस नतीजा नही निकला....बीते महीनें में ही पाकिस्तान से हजारों हिन्दु भारत आए....पाकिस्तान से भारत आये हिन्दुओं का कहना है पाकिस्तान में उन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जा रहा था जिसके चलते इन लोगों ने धर्म बदलने की बजाय देश बदलना ही बेहतर समझा...ऐसे ही कई हिन्दू परिवार पाकिस्तान छोड़कर भारत आये कुछ यहीं रह गये तो कुछ को मजबूरी वस वापस जाना पड़ा... दस हजार से ज्यादा लोग बिना नागरिकता के सिर्फ निवास परमिट पर यहां रह रहे हैं....14 दिसम्बर को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने पाक विस्थापित हिन्दूओं को नागरिकता का मुद्दा उठाया...मेघवाल ने अपने भाषण मे कहा कि भारत में पाक विस्थापितों के लिए कोई नीति नहीं है....मेघवाल ने कहा कि पाकिस्तान से भारत में आने वाले और पाकिस्तानी हिंदुओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह सभा सरकार से आग्रह करती है कि वह उन्हे मागरिकता प्रदान करने के लिए तत्काल कदम उठाए और उन्हे देश के अन्य नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एक समयबद्ध कार्य-योजना तैयार करें...इससे पहले भी संसद में कई बार पाक विस्थापित हिन्दुओं का मुद्दा उठ चुका है...राज्यसभा में 30 अगस्त 2012 को एक तारांकित प्रश्न संख्या 263 का जवाब देते हुए तत्कालिन विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा था कि भारत तथा पाकिस्तान के बीच 1972 के शिमला समझोते में एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्क्षेप न करने का प्रवधान है ये प्रश्न पाकिस्तान से हिन्दुओं को पलायन पर था..इसकी पहल यूपीए सरकार में ही 2005 में की गई थी....लेकिन उसके बाद से आए लोगों को अब तक नागरिकता नहीं मिली है....इस बाबत नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए साल 2013 दिसंबर में राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2013 पारित किया गया था जिसे 15वीं लोकसभा के आखिरी सत्र में पारित किया जाना था और इसे लोकसभा में सूचीबद्ध भी था.... यूपीए सरकार का आखिरी सत्र होने के नाते पाकिस्तानी शरणार्थियों को उम्मीद थी कि इस बार यह विधेयक लोकसभा में पारित करा दिया जाएगा और हजारों लोगों को नागरिकता समेत बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा दी जाएंगी.... इस विधेयक के माध्यम से नागरिकता कानून 1955 की धारा 5.1बी और एफ, 5(6) 6 ए, 7 ए, और 16 में संशोधन किया जाना है जो धार्मिक रूप से प्रताड़ित पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के पक्ष में है.....इसी उम्मीद में जैसलमेर और जोधपुर से करीब 500 पाकिस्तानी विस्थापित सीमांत लोक संगठन नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने आए थे....लेकिन लगातार तेलंगाना विधेयक पर बवाल के चलते यह बिल आखिरी दिन तक लटका रह गया और इसे पेश नहीं किया गया...लेकिन देश में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं को भारत की नागरिकता दिए जाने की राह अब खुलती नजर आ रही है....पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता और उनके हक दिलवाने का संघर्षरत राजस्थान के सीमांत लोक संगठन की माने तो 1965 के बाद से अब तक भारत में आए पाकिस्तानी हिंदुओं की संख्या करीब पांच लाख है...जिनमें मुख्यत: राजस्थान में रहने वाले दस हजार लोगों को नागरिकता नहीं मिली है....भारत ने 1951 की अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी संधि और 1967 में उसके प्रोटोकॉल पर दस्तखत नहीं किए हैं न ही यहां राष्ट्रीय स्तर का कोई कानून शरणार्थियों के संबंध में मौजूद है....नागरिकता पाने के लिए न्यूनतम सात साल भारत प्रवास का नियम है लेकिन इतने लंबे समय तक टिकने के लिए शरणार्थियों के पास कोई संसाधन नहीं मौजूद है...लेकिन सात साल की अवधि के बावजूद औसतन दस साल बिताने के बाद ही नागरिकता के दावेदार हो जाते हैं...पिछली बार नागरिकता देने का काम 2005 में किया गया था उसके बाद से किसी भी पाकिस्तानी शरणार्थी को पिछले नौ साल में नागरिकता नहीं दी गई है....दिल्ली में गृह मंत्रालय की टास्क फोर्स की हाल ही हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि ऐसे लोगों को लॉन्ग टर्म वीजा दिया जाएगा...इसके बाद ये देश में रहते हुए अपना पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि भी बनवा सकेंगे....वीजा संबंधी अधिकार राज्य सरकारों को दिए जाएंगे...बैठक में पाकिस्तानी सिंधी हिंदू परिवारों को भारतीय नागरिकता दिलवाने के लिए संघर्षरत संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था...देशभर से ऐसे 15 प्रतिनिधियों ने भाग लिया...

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