बाड़मेर में एक और मिग हुआ क्रैश

ये मिग नही उड़ता ताबूत है
क्या सरकार "रंग दे बसंती हकीकत" में चाहती है
प्रदेश के बाडमेर में एक बार फिर मिग विमान क्रेश हो गया है...हालंकि राहत की बात यह है विमान के पायलेट सुरक्षित हैं...लेकिन एक बार फिर से यह मांग उठने लगी है कि आखिर हादसों का पर्याय बन चुके मिग-21 की भारतीय वायु सेना से विदाई अभी तक क्यों तय नहीं हो पाई है...एक तरफ मिग-21को भारतीय वायु सेना में पचास साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर देश के इस पहले सुपर सोनिक फाइटर प्लेन को विदा करने की मांग तेज होने लगी है.... पिछले 3 साल के आंकडों के मुताबिक भारतीय वायु सेना के 30 फाइटर प्लेन क्रेश हो चुके हैं...जिसमें 13 मिग-21 क्रेश होने से 6 पायलेट अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे हैं...इसके अलावा इन पिछले तीन सालों में 8 मिग-27 और 1 मिग-29 भी क्रेश हुए...यानि कुल 30 हादसों में करीब 73 फीसदी हादसे मिग विमानों के नाम रहे. और तो और वो बेशकीमती पायलेट जो भारतीय वायु सेना की आन, बान और शान रहे ऐसे दर्जनों पायलेट की जान गई सो अलग...जानकारों के मुताबिक 1991 से 2003 के बीच भारत ने 250 मिग-21 विमान खो दिए...गौर करने वाली बात यह है कि 1963 में पहली बार भारतीय वायु सेना में मिग-21 को शामिल किया गया जिसके बाद से आज तक 352 से ज्यादा मिग-21 क्रेश हो चुके हैं और 170 से ज्यादा पायलेट अपनी जान गवां चुके हैं. एक्सपर्ट़स के मुताबिक मिग-21 के बढते हादसों के पिछले मामलों पर नजर डालें तो इसका कोई एक कारण नजर नहीं आता हैं...पहली बात यह कि मिग-21 भारतीय वायु सेना में काफी पुराने हो चुकें हैं, इनके रखरखाव के लिए और जरुरी उपकरण बनना अब बंद हो चुके हैं, इसमें 1 इंजन के कारण सबसे बडा रिस्क रहता है इंजन खराबी के बाद हादसा तय है...इसके अलावा अधिकांश नए पायलेट इनको उडा पाने में उचित प्रशिक्षण के अभाव में सक्षम नहीं होते हैं...इसके मेंटिनेंस के लिए बेहतर इंजीनियर्स और रिसर्च की भी भारतीय वायु सेना में कमी खल रही है क्योंकि पिछले पांच सालों में ही 433 के करीब साइंटिस्ट प्रिमियर डिफेंस रिसर्च एजेंसी से इस्तीफा दे चुके हैं...और तो और नए पायलेट भी मिग-21 हादसे के कारण बने हैं...हादसों के वक्त विमान चालक अधिकांश पायलेट बहुत ज्यादा अनुभव वाले नहीं थे....गौर करने वाली और चिंता की बात यह है कि भारतीय वायु सेना में करीब 50 फीसदी से अधिक मिग-21 इसी तरह के हादसों में नष्ट हो गए. ऐसे में आश्चर्य नहीं कि मिग-21 को उडता ताबूत कहा जाने लगा है -
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