आखिर क्या है महिलाओं के अधिकार

दिन.महीने,साल,शताब्दी.सवंत यहां तक की युग बीत गये 
"आखिर कब मिलेगा अधिकार" 
भारतवर्ष की भूमि पर धर्म और नीति का कभी भी चलन नही रहा...सतयुग,द्वापर और त्रेतायुग किसी भी युग का इतिहास देखे महिलाओं पर हमेशा अत्याचार ही होता रहा है...यहां तक की पुरुषोत्तम कहे जाने वाले श्री राम भी मां सीता को नारी प्रताडना से नही बचा सके...बल्कि एक धोबी के कहने पर मां सीता को वनवास तक भेज दिया...ये तो सतयुग था...द्वापर में तो इससे भी बुरा हुआ...एक महिला को जीवन भर के लिए काल कोठरी में डाल दिया जाता है...जब पूरा जीवन संघर्ष और परिक्षाओं का ही है तो किसी भगवान की क्या जरुरत...खैर राम राज्य का रहा सहा असर कृष्ण के आने से खत्म हो गया...द्वापर में शायद ही कोई युद्ध धर्म और सत्यता से जीता गया हो...यहां तक कि द्वापर के इतिहास के हर पन्ने पर धर्म को छला गया है....खैर हम बात महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों की कर रहें है जिसकी फेहरित बढ़ती ही चली गयी..यहां तक कि देवो के देव महादेव भी अपनी अर्धांगनी सती माता को भी अत्याचार और प्रकोप से नही बचा सके...उन्होने भी अतः स्वयः को जला कर अपनी जीवन लीला समाप्त की...
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