क्या चिदम्बरम लेंगे दादा की जगह

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भारतीय राजनीति क्रिकेट की तरह होती जा रही है। जैसे क्रिकेट अनिश्चिताओं का खेल माना जाता है। वैसे ही अब राजनीति भी अनिश्चिताओं से भरी है यहां कब किस पर गाज गिरेगी कौन सलाखों के पीछे जाएगा और कौन भ्रष्टाचार में लिप्त होते हुए सत्ता का सुख भोगेगा कहना मुश्किल है। हमेशा विपक्ष के निशाने पर रहने वाले वर्तमान गृहमंत्री व पूर्व वित्तमंत्री पी.चिदम्बरम पर एक बार फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं ने विश्वास जताते हुए उन्हें वित्त मंत्री पद का प्रबल दावेदार जता दिया है। प्रधानमंत्री ने स्पेक्ट्रम पर फैसला करने के लिए ईजीओएम का जिम्मा गृह मंत्री पी चिदंबरम को सौंपकर संकेत दे दिया है। कि वित्त मंत्रालय के लिए उनका दावा सबसे मजबूत है। वित्त मंत्री के लिए कई नामों में से राजनीतिक चेहरे के तौर पर चिदंबरम को प्रधानमंत्री की पहली पसंद बताया जा रहा है। वही सदन में लोकसभा के नेता पद की रेस में भी वे सबसे आगे हैं। मगर विपक्ष की बेंच में उनकी स्वीकार्यता को लेकर संशय के चलते पार्टी यह जोखिम किस हद तक ले पाएगी कहना मुश्किल है।रक्षामंत्री एके एंटनी राज्यसभा से हैं। ऐसे में लोकसभा में नेता सदन पद की रेस में चिदंबरम के मुकाबले सुशील कुमार शिंदे, कमलनाथ जैसे वरिष्ठ मंत्री हैं। वित्त मंत्री पद की दौड़ में आनंद शर्मा, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल के अलावा सी रंगराजन और मोंटेक भी बताए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद से जिस तरह के सकारात्मक संदेश बाजार को मिले हैं उससे सरकार और कांग्रेस के रणनीतिकार उत्साहित हैं। ऐसे में वित्त मंत्री पद पर कौन आए यह काफी हद तक मार्केट के भरोसा से जुड़ा होगा।कांग्रेस ने विवादों से घिरे चिदंबरम का यह कहते हुए बचाव किया है कि, आरोप लगाना एक बात है, यह देखना अहम है कि आरोपों में दम कितना है। कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि आरोप किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि वह व्यक्ति दोषी है। दरअसल प्रधानमंत्री के पास सीमित विकल्प हैं।कांग्रेस में एक बड़े धड़े का मानना है कि प्रणब के बाद गृह मंत्री पी चिदंबरम पर सरकार की निर्भरता काफी हद तक बढ़ गई है। विपक्ष की बेंच में उन्हें लेकर भले ही विवाद हो लेकिन वे प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष दोनों के लिए बहुत भरोसेमंद साथी हैं। प्रणब की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की व्यूहरचना में भी उन्होंने कांग्रेस की ओर से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस की कोर टीम का वह हिस्सा हैं। वरिष्ठता क्रम में वे शरद पवार और एंटनी से ही नीचे हैं। पवार राकांपा से हैं जबकि एंटनी परदे के पीछे का रोल ज्यादा निभाते हैं।
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