राष्ट्रपति ने ठुकराया पुणे का घर

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नई दिल्ली =देश की प्रथम नागरीक व पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने रिटायरमेंट के बाद पुणे में मिलने वाले घर का ऑफर ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा है कि वह यह घर स्वीकार नहीं करेंगी। मीडिया में आई रिपोर्ट्स के बाद उठे विवाद पर शुक्रवार को राष्ट्रपति ने यह कदम उठाया। सूत्रो के अनुसार ये उनका निजी फैसला है।उन्होंने कहा कि भावी योजना पर वह सही समय पर फैसला करेंगी। इस विवाद को विराम देने की मांग करते हुए शुक्रवार को जारी वक्तव्य में कहा गया, 'उम्मीद है कि इससे सारे संदेह खत्म हो जाएंगे।' गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रपति पाटिल को पुणे में बंगला बनाने के लिए तय सीमा से छह गुना ज्यादा जमीन देने का मामला सामने आया था और इस पर काफी विवाद चल रहा है। यह जमीन सेना की थी। पुणे में भूतपूर्व सैन्यकर्मियों के एक संगठन ने आरोप लगाया था कि कार्यकाल खत्म होने के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के निवास के लिए सेना की 5 एकड़ से ज्यादा भूमि अलॉट की गई है। आरटीआई से इसका खुलासा हुआ था। आरटीआई के मुताबिक पाटिल को खड़की कैंट एरिया में सेना की 26,100 स्क्वेयर फीट जमीन अलॉट की गई। पूर्व सैनिक इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि सैनिकों और उनके परिवारों के लिए जमीन पहले से ही कम है। उन्होंने जमीन के अलॉटमेंट की जानकारी के लिए आरटीआई फाइल की थी , जिसमें प्रेजिडेंट को पात्रता से कई अधिक जमीन देने का खुलासा हुआ। नियम के मुताबिक प्रेजिडेंट 4500 स्क्वेयर फीट के सरकारी बंगले या फिर सरकार के अधिकार वाले 2000 स्क्वेयर फीट के बंगले के लिए ही पात्र हैं। प्रेजिडेंट सरकारी जमीन पर निर्माण भी नहीं करवा सकती हैं। पूर्व सैनिकों का आरोप है कि राष्ट्रपति प्लॉट पर बंगले का निर्माण करवा रही हैं और इसके लिए ब्रिटिश जमाने के दो बंगलों को तोड़ा जाएगा। हालांकि राष्ट्रपति भवन ने लगातार यह कहा कि कुछ भी गलत नहीं हो रहा या किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा। राष्ट्रपति के रिटायरमेंट के बाद रहने के लिए बनने वाले आवास के लिए सारे नियमों का कड़ाई से पालन किया गया। बहरहाल, शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति पुणे में प्रस्तावित यह आवास अब नहीं लेंगी। मीडिया में आ रही तरह-तरह की रिपोर्टों से राष्ट्रपति आहत हैं। इसी वजह से उन्होंने फैसला किया है कि वह पुणे में यह आवास स्वीकार नहीं करेंगी। राष्ट्रपति भवन के वक्तव्य में कहा गया, कुछ लोगों द्वारा मामले को युद्ध विधवाओं के आवास से जोड़े जाने पर राष्ट्रपति ने पुणे में प्रस्तावित आवास के अलॉटमेंट को त्यागने का फैसला किया है।' वक्तव्य में पुणे के आवास का हवाला दिया गया लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि राष्ट्रपति की रिटायरमेंट के बाद क्या योजनाएं हैं।
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