यूपी विस:हंगामे के बीच कार्रवाई 12:20 तक स्थगित


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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार को अभूत सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुआ। 15वीं विधानसभा का यह आखिरी सत्र जैसे ही शुरू हुआ हंगामे की भेंट चढ गया। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देते हुए मुख्यमंत्री मायावती से इस्तीफे की मांग की।
प्रस्ताव का कांग्रेस ने समर्थन करने की घोषणा की है। सदन के अंदर बैनर लेकर विपक्षी सदस्यों ने सरकार का विरोध किया। सरकार को बर्खास्त किए जाने की मांग करते हुए सपा विधायक बैनर लेकर स्पीकर की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश करने लगे। स्पीकर के समझाने बुझाने के बाद भी जब हंगामा शांत नहीं हुआ तो सदन को 12 बजकर 20 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। हंगामे के समय मुख्यमंत्री मायावती सदन में मौजूद नहीं थीं। इससे पहले सरकार ने विधानसभा में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। विधानसभा के भीतर परिसर प्रादेशिक सशस्त्र बल की दो कंपनियां तैनात की गई हैं। भारत के संसदीय इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब किसी विधानसभा के भीतर परिसर सशस्त्र बल तैनात किए गए हैं।
इससे पहले सपा और भाजपा ने विधानसभा के प्रमुख सचिव को मायावती सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। विपक्ष के अविश्वास के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी ने अपने निलंबित विधायक अवधपाल सिंह और सांसद धनंजय सिंह का निलंबन वापस ले लिया है। साथ ही मायावती ने सभी विधायकों को साजिशों से सावधान रहने और विपक्ष को करारा जवाब देने की नसीहत दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि इस सत्र में मायावती के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है। सपा स्पीकर से अनुरोध करेगी कि सरकार के कामकाज पर सदन के भीतर बहस कराई जाए। शिवपाल ने कहा कि इसी सिलसिले में बीती शाम हमने राज्यपाल से मुलाकात कर बसपा सरकार को बर्खास्त करने का अनुरोध किया था।
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