‘भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए केवल भाषण देना ही काफ़ी नहीं है’

लोकपाल पर दिग्विजय या सिब्बल का नहीं...इस बार सोनिया का आया बयान...शालीन मुस्कान नहीं...इस बार
तल्ख लहजा, बदले तेवर।

‘भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए केवल भाषण देना ही काफ़ी नहीं है’
भाषण नहीं देने की नसीहत और किसी ने नहीं कांग्रेस और भारत की सबसे सशक्त महिला सोनिया गांधी ने दी है...इस भाषण में सोनिया गांधी का कहना था, “प्रधानमंत्री ने पहले ही कह दिया है कि सरकार संसद में एक मज़बूत लोकपाल बिल लाने के लिए प्रतिबद्ध है। तो फिर इस बारे में हंगामे या बवाल की क्या ज़रूरत है?”
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सोनिया गांधी ने अपने भाषण के ज़रिए लोगों को ये बात भी याद दिलाई कि सूचना के अधिकार का क़ानून उनकी सरकार लाई थी.। सोनिया गांधी का ये भाषण बुधवार को उत्तराखंड में एक सार्वजनिक रैली में पढ़ा गया। कुछ महीने पहले विदेश से इलाज करवा कर भारत वापस आने के बाद सोनिया गांधी को अपनी पहली सार्वजनिक सभा में हिस्सा लेना था. लेकिन तबीयत ख़राब होने की वजह से वे रैली में नहीं पहुंच सकीं, इसलिए उनका भाषण पढ़ कर सुनाया गया।
अन्ना ने भी दिया जवाब
सियासत में मानो इस बयान के पढ़े जाने के बाद जंगल की आग लग गई। आनन फानन में अन्ना ने जवाबी बयान जारी कर दिया... सोनिया के इस भाषण के जवाब में अन्ना हजारे ने ये साफ कह दिया कि वो किसी भी तरह का दबाव नहीं डालते हैं...
बयान का कितना होगा असर ?
जनलोकपाल जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सोनिया की तरफ से अब तक सोनिया सामने नहीं आईं थीं। अब जब वो सामने आईं तो बदले तेवर के साथ...इस बदले अंदाज का असर टीम अन्ना और सरकार की बात-चीत पर कैसा होगा...क्या बढे़गी तकरार जब होगा सामना अन्ना और सोनिया का?...
बात निकली है तो दूर तलक जाएगी
फिलहाल लिखे हुए भाषण को पढ़े जाने से असर कुछ तो कम जरूर लग रहा है......लेकिन बात निकली है तो दूर तलक जाएगी...भाषण पर बयानबाजी तो शुरू हो गई है । आगे ये देखना दिलचस्प होगा कि कैसे सार्वजनिक मंच से सोनिया अन्ना को चुनौती देंगी...और कैसे अन्ना देंगे सोनिया को जवाब....
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