पार्टियों को चंदा क्या भूत दे रहे हैं ! अजब गोलमाल है

भारत के राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे पर हमेशा से सवाल खड़े होते रहे हैं। इसके पीछे वजह भी है, वो ये कि पार्टिंयां चंदा देने वालों के नामों का खुलासा ही नहीं करतीं। हर साल पार्टियों के बहीखाते में सैंकड़ों करोड़ का लेन देन होता है लेकिन जब हिसाब की बारी आती है तो बड़ी चतुराई से चंदा देने वालों का नाम छुपा लिया जाता है। दरअसल कानून ही उन्हें इस तरह की छूट देता है। रीप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट में राजनीतिक दलों को किसी व्यक्ति या संस्था से अगर 20 हजार रुपए से ज्यादा चंदा देने वाले की पहचान बतानी होती है और इससे कम चंदा देने वाले का नाम उजागर न करने की छूट है। पार्टियां अक्सर इसी कानून का लाभ उठाती हैं और चंदे से जुटने वाली ज्यादतर रकन 20 हाजर से कम ही दिखाई जाती है। इस मामले से परिचित लोगों का कहना है कि यह महज इत्तफाक नहीं है कि ज्यादातर चंदे 20 हजार रुपए से ऊपर नहीं होते, जिसके चलते दान देने वालों की पहचान जाहिर नहीं हो पाती।

कांग्रेस, बीजेपी, एनसीपी और बीएसपी ने बीते 5 बरसों के दौरान चंदा देने वालों की जो लिस्ट और रिटर्न दाखिल किए हैं, उनसे साफ होता है कि इन दलों ने उन दानदाताओं की पहचान नहीं उजागर की है, जिनसे उन्हें ज्यादातर फंड मिलते हैं।

कांग्रेस ने जुटाए 1063 करोड़
2004-05 से लेकर 2008-09 तक कांग्रेस ने कूपनों की बिक्री से कम से कम 978 करोड़ रुपए जुटाए, लेकिन उसने अधिकारियों को सहयोग देने वालों की कोई लिस्ट नहीं मुहैया कराई। इसकी तुलना में इसी अवधि में कांग्रेस ने चंदा देने वालों के नाम पर महज 85 करोड़ रुपए जुटाए।

बीजेपी ने जुटाए 127 करोड़
बीजेपी विपक्ष में रहते हुए चंदा जुटाने में उतनी कामयाब नहीं रही है। उसने 2005 से 2009 के बीच आजीवन सहयोग निधि कूपनों की बिक्री से 32 करोड़ रुपए हासिल किए। इसके मुकाबले उसे ज्ञात दानदाताओं से 95 करोड़ रुपए मिले।

बीएसपी ने जुटाए 200 करोड़
जहां तक बीएसपी का सवाल है तो वह आकार छोटी होने के बावजूद फंड जुटाने में ज्यादा कामयाब रही है। पार्टी को 2007-08 से 2008-09 के बीच यानी महज दो बरसों में 200 करोड़ रुपए का नकद चंदा मिला। बीएसपी ने उसे सहयोग करने वालों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। पार्टी का दावा है कि सारे चंदे 20 हजार रुपए से कम हैं। जब इनकम टैक्स अधिकारियों ने चंदा देने वालों की पहचान उजागर करने की कोशिश की, तो बीएसपी ने दलील दी कि उसे नकद धनराशि देने वाले पार्टी के गरीब समर्थक हैं, जिन्होंने पार्टी नेता मायावती के प्रति प्रेम के चलते ऐसा किया।
Tags: , ,

0 comments

Leave a Reply