लोकायुक्त की जांच के घेरे में यूपी के मंत्री

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों पर एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। इन मंत्रियों पर लोकायुक्त की जांच का शिकंजा कसता जा रहा है। सूबे के संस्कृति मंत्री सुभाष पाण्डेय लोकायुक्त जांच के लपेटे में आ गए हैं। पाण्डेय पर दलितों की जमीन कब्जाने सहित कई आरोप लगे हैं। लोकायुक्त ने आरोपों की जांच की रिपोर्ट जौनपुर के डीएम से मांगी है।

गौरतलब है कि अवधपाल सिंह, बादशाह सिंह के बाद सूबे के मंत्री सुभाष पांडे पर जमीन पर जबरन कब्जे के कई संगीन आरोप हैं। जौनपुर जिले के मछली शहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुभाष पांडे पर आरोप है कि इन्होंने न तो मुर्दों के लिए जमीन छोड़ी और न ही भगवान को बेघर करने में कोई कसर छोड़ी। जिसने जमीन देने में आनाकानी की उसके खिलाफ खाकी का इस्तेमाल कर डराने-धमकाने की कोशिश की।

मालूम हो कि इलाके के पीड़ित एक शख्स ने लोकायुक्त में शिकायत कर आरोप लगाया कि मुंगराबाद में बेटे के मकान के पास मंत्री जी ने कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा कर अपना बोर्ड लगा लिया है। इलाके के काली मंदिर की जमीन की रजिस्ट्री कुछ ऐसे बेनामी लोगों से अपने नाम करवा दी जिनका इस प्रॉपर्टी से कोई लेना देना नहीं है। कुछ लोगों के मकानों पर कब्जा कर लिया है। मंत्री पर आरोप है कि शबीना बेगम नाम की महिला ने जब जमीन बेचने से इनकार दिया तो उसके बेटे के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया। इतना ही नहीं बल्कि एक ऐसे शख्स का बयान लिखा गया जो अब इस दुनिया में ही नहीं है।

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सूबे के लोकायुक्त एन के महरोत्रा ने डीएम से जानकारी मांगते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं, जब मंत्री जी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने ऐसी जानकारी होने से इनकार कर दिया।
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