रेड्डी बंधुओं का सुषमा कनेक्शन

किस्मत ने सियासत में भी रेड्डी भाइयों का साथ दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का बेल्लारी से लोकसभा चुनाव लड़ना इनके लिए फायदेमंद साबित हुआ। बीजेपी ने सोनिया के जवाब में सुषमा स्वराज को उतारा और रेड्डी बंधुओं ने चुनाव में उनके लिए काम किया। तब से वे सुषमा को 'ताई' कहकर पुकारते हैं और गर्व से कहते हैं, 'हम अपनी ताई को कभी ना नहीं कह सकते। 'हाल ही में सुषमा ने कहा था कि रेड्डी भाइयों को येदयुरप्पा सरकार में मंत्री बनवाने में उनका हाथ नहीं है। अरुण जेटली और वेंकैया नायडू जैसे सीनियर नेता कर्नाटक के मामलों को देख रहे हैं।

संपत्ति ने बढ़ाया सियासी कद
कर्नाटक बीजेपी में रेड्डी भाइयों के रसूख की वजह उनकी अरबों रुपये की संपत्ति है। माना जाता है कि उन्होंने मई, 2008 में बीजेपी के लिए बहुमत जुटाने में अहम भूमिका अदा की, जिससे दक्षिण भारत में पार्टी की पहली सरकार बन पाई। उन चुनावों में बीजेपी ने 225 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा की 110 सीटें जीती थीं। इन्होंने पार्टी को 5 निर्दलीय विधायकों का समर्थन दिलाया, जिससे वह सदन में 115 के आंकड़े पर पहुंच सकी। इन पांचों निर्दलीयों को कैबिनेट में जगह दी गई।

पैसा भी लगाया
माना जाता है कि रेड्डी ब्रदर्स ने बीजेपी का 'ऑपरेशन लोटस' प्रायोजित किया, जिसके तहत कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को इस्तीफा दिलवाकर बीजेपी के टिकट पर उपचुनाव लड़वाया गया। इन चुनावों में उन्होंने बीजेपी को जीत दिलाकर उसकी सीटों की संख्या 119 पर पहुंचाई और पार्टी को अपने बूते पर बहुमत दिलाया।

बगावत की
2009 में रेड्डी भाइयों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री येदयुरप्पा के खिलाफ बगावत की। वजह थी बेल्लारी में अधिकारियों की मनमाफिक तैनाती की छूट न मिलना। वे जेटली, नायडू और दूसरे नेताओं के कहने के बावजूद पीछे नहीं हटे। तब सुषमा ने हस्तक्षेप किया। येदयुरप्पा को भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्हें अपनी नजदीकी और एकमात्र महिला मंत्री शोभा करंदलाजे को सरकार से बाहर करना पड़ा। कुछ विश्वासपात्र अधिकारियों को भी हटाना पड़ा।
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