टीम अन्ना के पीछे हाथ धोकर पड़ी सरकार


शांति भूषण, प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवार, किरन बेदी, कुमार विश्वास, ओमपुरी, रामदेव ये वो नाम हैं जिन्होंने सरकार को ललकारने की कोशिश की... अन्ना के मंच से भ्रष्टाचार के खिलाफ हल्लाबोल दिया... लेकिन अब सरकार इनपर पलटवार करने में लगी है... gfx in शांति भूषण को सीडी मामले में फंसाया जा रहा है...प्रशांत भूषण पर संसद की अवमानना का आरोप लगाया गया है...अरविंद केजरीवाल को आयकल का 9 लाख रुपए वसूली का नोटिस भेजा गया है... कुमार विश्वास को अग्रिम आयकर जमाकराने का नोटिस भेजा गया है... किरन बेदी और ओमपुरी पर संसद की अवमानना का आरोप लगाया गया है और रामदेव के खिलाफ फेमा के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है... इन नोटिस और कार्रवाई का सच क्या है... इसका फैसला तो अदालत करेगी लेकिन फिलहाल जनता की अदालत में सरकार की भूमिका संदेह के कटघरे में है... सवाल इन कार्वाईयों के समय को लेकर है... आखिर क्यों अन्ना के अनशन के दौरान ही सारे मामाले क्यों एक साथ खुले.. क्यों केजरीवाल को वसूली का नोटिस भेजने के लिए आयकल विभाग सालों इंतजार करता रहा.. क्यों बाबा रामदेव की कंपनियों पर फेमा का मुकदमा अन्ना के अनशन के तुरंत बाद दर्ज किया गया... क्या सरकार ने अपने खिलाफ खड़ी होने वाली हर आवाज का सिर कलम करने के लिए नौकरशाही की तलवार थाम ली है।
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