गंगा के जल के लिए विवाद


गंगाजल बंटवारे को लेकर हो रहा है विवाद
गंगाजल बंटवारे को लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच 1996 में हुए समझौते के मुद्दे पर पूर्व सिंचाई मंत्री सांसद जगदानन्द व वर्तमान जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विजय कुमार ने कहा कि केन्द्र में जिस दल की सरकार थी उसी दल की राज्य में सरकार थी तो किस आधार पर गंगाजल बंटवारे को लेकर 1996 में राज्य के हितों के विरुद्ध समझौता हुआ। उन्होंने कहा कि पूर्व सिंचाई मंत्री किस भूगोल के आधार पर कोसी बराज के माध्यम से समुद्र तट तक पहुंचने की बात करते हैं। बिहार तो गंगा नदी के माध्यम से सीधे-सीधे समुद्र से जुड़ा है और बिहार को समुद्र तट तक पहुंचने के लिए कोसी को देखने की क्या जरूरत है। उधर पूर्व सिंचाई मंत्री सांसद जगदानन्द ने कहा कि फरक्का बैराज पर गंगाजल बंटवारे को लेकर भारत-बांग्लादेश का समझौता पहली बार 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के कार्यकाल में हुआ था ये भ्रम जल संसाधन मंत्री को अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए। भारत-बांग्लादेश का समझौता पहली बार 1975 में हुआ था और इसकी पुनरावृत्ति 1977 में हुई जब मोरारजी भाई देसाई प्रधानमंत्री व अटलबिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे। दिसम्बर 1996 के समझौते का परिणाम हुआ कि बांग्लादेश को न्यूनतम पानी मिला व भारत को पूर्व की अपेक्षा अधिक पानी मिला। फरक्का बैराज का निर्माण ही कोलकात्ता बंदरगाह को जिन्दा रखने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि गंगा नदी एक नदी नहीं बल्कि गंगा बेसिन है जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक पानी नदियों का बिहार की सीमा में ही गंगा को मिलता है। यमुना-चंबल -टोन्स-गोमी-घाघरा से अधिक पानी सोन-गंडक -बूढ़ी गंडक -बागमती- कमलाबलान -कोसी -महानन्दा के पास है। इस पानी से मात्र 650 क्यूमेक्स पानी गंगा में देना हमारी जिम्मेवारी है। शेष पानी बिहार का है। इस पानी को लेने से कोई रोक नहीं सकता है।
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