पंजीकरण के बगै़र चल रहें हैं स्कूल


1500 स्कूलों का नहीं है पंजीकरण
राज्य सरकार के आदेश के बावजूद निजी विद्यालय रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। हैरत की बात यह कि पंजीकरण नहीं कराने वाले निजी विद्यालयों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई भी नहीं हो रही है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मानव संसाधन विकास विभाग ने बिहार सरकार के निर्देश पर निजी स्कूलों के पंजीकरण कराने का निर्देश जिला प्रशासन को दे रखा है। मगर राज्य सरकार के निर्देश का डर न जिला शिक्षा अधिकारी को है और न ही स्कूल प्रबंधकों को। इसका प्रमाण यह है कि जिले में महज 70 स्कूल ही पंजीकृत हैं जबकि 1500 से अधिक निजी विद्यालय इस समय चलाये जा रहे हैं। फिर भी जिला शिक्षा अधिकारी की तरफ से कोई भी कार्यावाही नहीं की जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार (RTE) को लागू कर दिया गया है। मगर इससे बचने के लिए ज्यादातर निजी स्कूल पंजीकरण कराने में रूचि नहीं ले रहे हैं, जबकि अगले शैक्षिक सत्र से निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब बच्चों का नामांकन लेना अनिवार्य है। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा भी आवश्यक कार्रवाई के तहत निजी स्कूलों को पंजीकरण कराने का निर्देश दे रखा है। जिला शिक्षा अधिकारी मेदो दास ने निजी स्कूलों के लिए पंजीकरण की व्यवस्था सर्व शिक्षा अभियान के जिला कार्यालय में की है, जिसके प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी सचिन्द्र कुमार को बनाया गया है। सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय के अनुसार, अभी तक महज जिले से 359 स्कूलों ने पंजीकरण कराने के लिए आवेदन दिया है, जबकि 70 विद्यालय पहले से ही पंजीकृत हैं। इनमें राजधानी के सभी बड़े निजी विद्यालय शामिल हैं।-गैरपंजीकृत निजी स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अगर 30 सितम्बर तक ऐसे विद्यालय पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा नहीं किये तो उन्हें बंद करा दिया जाएगा।
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