हरर्नौत रेल कारखाने का ट्रायल शुरू



























दो-तीन माह में हरनौत रेल कारखाने का ट्रायल शुरू रेल डिब्बे के रखरखाव में पूर्व मध्य रेलवे ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा दिया है। हरनौत रेल कारखाना का निर्माण अंतिम चरण में है। वहां व्हिल टर्निग का ट्रायल शुरू हो चुका है और बोगी का ट्रायल तीन माह में प्रारंभ हो जाएगा। ट्रायल के लिए पूर्व मध्य रेलवे ने वहां करीब दो दजर्न बोगियां भेज दी हैं। रेलकर्मियों को कारखाना के संचालन की तकनीक का विशेष प्रशिक्षण पश्चिम बंगाल के लिलुआ (कोलकाता) के निकट चल रहा है। कर्मियों की एक टीम प्रशिक्षण पाकर वापस भी आ चुकी है। इस समय पूर्व मध्य रेलवे के पास तकरीबन 3000 बोगियां हैं और इनमें से 15 फीसदी से अधिक को हर वर्ष मेन्टेनेंस की जरूरत पड़ती है। इन्हें जरूरत के हिसाब से मेन्टेनेंस के लिए पश्चिम बंगाल के लिलुआ और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर भेजा जाता है। हालांकि पैसेन्जर ट्रेनों की बोगियों का मेन्टेनेंस डिविजन में ही हो जाता है। मेल-एक्सप्रेस बोगियों को राज्य से बाहर भेजना पड़ता है। 137 एकड़ में निर्मित बिहार के इस पहले कोच मेन्टेनेंस फैक्ट्री का शिलान्यास तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने 30 जून 2003 को किया था। हालांकि इसके निर्माण की गति बेहद धीमी रही। हरनौत वर्कशाप पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड होगा और यहां विश्व की अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। सिर्फ वर्कशाप पर ही पांच करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च हो रही है। रेल डिब्बों का मेन्टेनेंस दो स्तरों पर होगा। पहला-नौ माह पर और दूसरा-18 माह पर।





















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