कहां से मिल रही है अन्ना को ऊर्जा

अन्ना के अनशन का लगातार जारी है और सरकार ने मांगे मानने में आनाकानी कर रही है…. सरकार अन्ना के आंदोलन को संसदीय लोकतंत्र के लिए खतरा बता रही है... तो..टीम अन्ना भी लगातार सरकार को ललकार रही है... ऐसे में समझना होगा कि आखिर क्यों पूरे देश अन्ना के पीछे खड़ा हो गया है।

अन्ना के साथ खड़ा है देश
अन्ना की एक आवाज पर पूरा देश उनके साथ खड़ा हो गया... पूरी दुनिया ने देखा अन्ना जो कहते गए लोग वही करते गए.... बिना ये समझे कि लोकपाल क्या है और जनलोकपाल से क्या होगा… लोग तो बस अन्ना को अपनी आवाज मान रहे हैं...

अन्ना में देखा रहनुमा
अन्ना के रूप में लोगों को अपना रहनुमां नजर आ रहा है... जिसकी तलाश उन्हें दशकों से थी... जो सिर्फ उनकी बात ही नहीं करता बल्कि उसके पास अमल के ठोस तरीके भी हैं... लोगों को भरोसा है कि रामलीला मैदान के मंच से महज राजनीति नहीं हो रही... बल्कि बदलाव की नींव रखी जा रही है... वो बदलाव जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सवासौ करोड़ लोगों की जरूरत बन चुका है।

खाने को रोटी नहीं घोटाले लाखों करोड़ के
अन्ना कहते हैं जिस देश में करोडों लोगों को दो जून की रोटी नहीं मिल रही वहां लाखों करोड़ के घोटाले हो जाते हैं...चंद घोटालेबाजों पर सालों घोटाले चलते हैं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता... अगर किसी को सजा हो भी जाए तो भी घोटाले का रकम कभी वापस नहीं आती... अन्ना इसी सिस्टम को बदलने को कह रहे हैं।

नेताओं के खोखले वादे
ढाई दशक पहले प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि सरकारी खजान से एक रुपया चलता है और लोगों तक महज 15 पैसे ही पहुंचते हैं.... और अब राहुल गांधी ने कहा कि एक रुपए में से महज 10 पैसे ही पहुंच रहे हैं। लाखों लोग सड़को पर उतरे लेकिन आम आदमी से वोट मांगने वाले राहुल और आम आदमी कि चिंता में पीएम को चिट्ठी लिखने वाली सोनिया गांधी कहीं नजर नहीं आईं... सोनिया न्यूयॉर्क में स्वास्थय लाभ कर रही हैं लेकिन उनका भी कोई बयान नहीं आया... साफ है कि लोग समझ चुके हैं कि चाहे राहुल हों... आम आदमी को रिझाने वाले बयान महज वोट की खातिर दिए जाते हैं... उधर अन्ना है कि भ्रष्टाचार मिटाने की खारित अपनी जान दांव पर लगा दी है।
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