अन्ना भरेंगे सिब्बल के घर पानी

करप्शन के खिलाफ अपनी मुहिम को अगले चरण में पहुंचाते हुए आमरण अनशन शुरू करने से एक दिन पहले सोमवार को अन्ना ने कहा कि सरकार सत्ता और पैसे के नशे में चूर है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन की लड़ाई के बिना देश का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता।

अन्ना ने कंस्टीट्यूशन क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कई अहम मसलों की चर्चा की। उन्होंने सवाल किया कि गांव वालों की जमीन उद्योगपतियों को क्यों सौंपी जा रही है ? उन्होंने कहा कि किसान आज पानी मांगते हैं तो उनपर गोलियां चलाई जाती हैं। अन्ना ने कहा कि आज हर चीज के लिए गांवों को शहरों के पीछे भागना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों की नहीं सिर्फ उद्योगपतियों की सुनती है।

अन्ना ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कपिल सिब्बल की भाषा बोल रहे हैं। उनकी बातों से दुख होता है। उन्होंने कहा कि बार-बार संसद और लोकतंत्र की दुहाई दी जाती है। हमें संसद पर पूरा भरोसा है। लेकिन, यह भी ध्यान में रखना है कि आज 4 सांसद जेल में हैं। 150 सांसदों पर इल्जाम है। क्या यही लोकतंत्र है? उन्होंने कहा कि जनता स्वच्छ छवि वालों को चुने यह भी जरूरी है।

पानी भरने को तैयार हूं
अन्ना ने कहा कि लोकपाल बिल को लेकर यह सवाल उठाना गलत है कि क्या जन लोकपाल बिल के बाद करप्शन नहीं रहेगा? उन्होंने कहा, यह सवाल उठाने वाले लोग जनता को गुमराह करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं लिख कर देता हूं कि अगर जन लोकपाल बिल ज्यों का त्यों पास कर दिया जाए तो करप्शन सौ फीसदी नहीं लेकिन 60-65 फीसदी जरूर कम हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं सिब्बल के घर पानी भरने को तैयार हूं।'

शिवाजी का रास्ता भी अपना सकते हैं
अन्ना ने कहा कि करप्शन सारी समस्याओं की जड़ में है। उन्होंने कहा कि महंगाई से देश की जनता त्रस्त है। महंगाई की वजह भी करप्शन है। कप्शन के चलते ही महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तो अनशन का गांधीजी का रास्ता अपना रहे हैं। अगर सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया तो फिर शिवाजी का रास्ता भी अपना सकते हैं।

अन्ना ने कहा कि अगर मुझे रोका गया तो मैं गिरफ्तारी दूंगा और जेल में ही अनशन करूंगा। उन्होंने पूरे देश से आह्वान किया कि अगर कम हम जेल जाते हैं तो गांव-गांव के लोग जेल जाएं। लेकिन पूरा आंदोलन शांति से चलाना है। अहिंसा में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत से हमें आगे बढ़ना है।
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