गुल्जार का जन्मदिन, 75 के हुए

यूँ तो और भी गीतकार हैं बॉलीवुड में लेकिन कहते हैं कि गुलजार का है अंदाजे बयाँ और... और इसी अंदाजे बयाँ ने गुलजार को भी बॉलीवुड में अपना अंदाज नया करते हुए ताजादम बने हुए हैं। झूम बराबर झूम और बंटी की बब्ली हुई जैसे गीतों की जबर्दस्त लोकप्रियता से इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
मकई की रोटी, गुड़ रखके मिसरी से मीठे लब चख के में गुलजार के लफ्जों ने भूलाए जा चुके स्वाद को एक बार फिर लोगों की जुबान पर ताजा कर दिया तो कजरारे कजरारे तेरे नैना कारे कारे का जादू तो लोगों को सिर चढ़कर बोला...
गुलजार ने लोकप्रियता और साहित्यिकता के अंतर की खाई को अपनी गजब की रचनात्मकता से मिटा दिया था। गुलजार की कलम से निकले मदाक शब्दों ने नशीली-फड़कती धुनों के साथ मिलकर ऐसा कॉकटेल तैयार किया कि अहसास की मोटी पर्त लोगों के जहन पर चढ़ गई...

आधुनिक युग में गुलजार का वही जल्वा कायम है... फिल्म इंडस्ट्री में गुलजार साहब शब्दों के बाजीगर के रूप में जाने जाते है। पश्चिमी पाकिस्तान के दीना गांव में 18 अगस्त 1936 को जन्मे संपूर्ण सिंह उर्फ गुलजार ने न सिर्फ गीतकार के रूप मे बल्कि लेखक, निर्माता और निर्देशक के रूप मे भी बालीवुड में अपनी खास पहचान बनाई।

गुलजार मुंबई आए लेकिन सपनों की नगरी में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जीवनयापन के लिए गुलजार ने मोटर गैराज मे एक मैकेनिक की नौकरी भी की।
गुलजार के सिने कैरियर की शुरूआत वर्ष 1961 मे विमल राय के असिस्टेंट के रूप में हुई। गुलजार ने हृकेश मुखर्जी और हेमन्त कुमार के सहायक के तौर पर भी काम किया।

इसके बाद गुलजार ने पीछे मुडकर नहीं देखा। उन्होंने एक से बढ़कर एक गीत लिखकर लोगों के दिलों दिमाग को झकझोर कर रख दिया। गुलजार ने 1971 मे फिल्म मेरे अपने के जरिए निर्देशन के क्षेत्र मे भी कदम रखा। इसके बाद कोशिश, परिचय, अचानक, खूशबू, आंधी, मौसम, किनारा, किताब, मीरा, नमकीन, अंगूर, इजाजत, लिबास, लेकिन, माचिस और हू तू तू जैसी कई फिल्मों का डायरेक्शन किया।

निर्देशन के अलावा गुलजार ने कई फिल्मों की पटकथा और संवाद भी लिखे। इसके अलावा गुलजार ने वर्ष 1977 में किताब और किनारा फिल्मों का निर्माण भी किया। गुलजार को अपने गीतों के लिए अब तक दस बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

गुलजार को तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। उनके योगदान के लिए 2004 में गुलजार को देश के तीसरे बडे़ नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। गुलजार के गीतों की चमक ने 2009 ने दुनिया को चकाचौंध कर दिया... जब फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर में उनके गीत जय हो को आस्कर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
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