चीन की तेज चाल से चिंता, भारत ने की जवाबी तैयारी

नई दिल्ली. ड्रैगन की चाल तेज होती जा रही है और इससे भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ रही है। चीन द्वारा सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास से भारत, बढ़ती सामरिक ताकत से जापान तो क्रेडिट रेटिंग घटने से अमेरिका की चिंता बढ़ रही है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से लगायत लेह लद्दाख में सीमा के नजदीक चीनी सेना की अगुवाई में चल रहे बुनियादी ढांचे के निर्माण से भारत की चिंता बढ़ रही है। लेकिन चीन की हरकतों से चिंतित भारत ने जवाबी तैयारी शुरू कर दी है। चीन की अरुणाचल प्रदेश पर टेढ़ी नज़र है। इसे देखते हुए भारत ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को विकसित करने का फैसला किया है। इस राज्य में तीन रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना तैयार की है। इसमें एक ट्रैक रणनीतिक तौर पर अहम तवांग को असम से जोड़ेगा।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मिसामारी (असम)-तवांग, उत्तरी लखीमपुर (असम)- अलॉन्ग (अरुणाचल प्रदेश)-सीलापाथर (असम) और मुर्कान्गसेलेक (असम)- पासीघाट (अरुणाचल)- रुपई (असम) को जोड़ने के लिए रेलवे ट्रैक बिछाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। इन तीनों रेल लाइनों तवांग को जोड़ने वाली रेल लाइन सबसे अहम है। तवांग भारतीय सेना का बड़ा केंद्र है। मौजूदा समय में तवांग जाने के लिए सड़क का इस्तेमाल करना होता है जो खराब मौसम के चलते बंद भी हो जाती है। वहीं, ऐसे मौसम में हेलीकॉप्टर से भी नहीं चलते हैं, जिससे तवांग पहुंचना मुश्किल होता है।

वहीं, जापान चीन की बढ़ती सामरिक ताकत से परेशान है। चीन ने हाल ही में पूर्व सोवियत संघ से लाए गए 60,000 टन वजन के एयरक्राफ्ट करियर को अपने बेड़े में शामिल किया है। जानकार मानते हैं कि अगर यह जहाज समुद्र में अभ्यास के लिए नहीं भेजा जाता है तो चीन की नौसेना इसका इस्तेमाल युद्ध के दौरान होने वाली गतिविधियों के अभ्यास में कर सकता है। वहीं, चीन शंघाई में खुद एक एयरक्राफ्ट करियर का निर्माण कर रहा है। चीन ने गहरे समुद्र में अपनी गतिविधियां तेज करने के लिए अब एयरक्राफ्ट करियर के बेडे़ तैनात करने की योजना बनाई है। चीन अमेरिकी नौसेना को क्युशु, ओकीनावा और ताइवान और फिलीपींस की तरफ आने से रोकना चाहता है। वहीं, चीन मध्य 2030 तक ओगासवारा द्वीप, गुआम और पापुआ न्यू गिनी के आसपास हवा और समुद्र में अपनी ताकत को बहुत ज़्यादा बढ़ाना चाहता है।

चीन की सेना कैरियर किलर एंटीशिप बैलिस्टिक मिसाइल का विकास भी कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि ये कैरियर किलर मिसाइलें अमेरिका के समेत चीन के दुश्मन देशों के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती हैं। इसके अलावा चीन के दक्षिण में समुद्र में मौजूद प्राकृतिक गैस और दूसरे संसाधनों पर कब्जा जमाया जाए।
दूसरी ओर, चीन सरकार द्वारा नियंत्रित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी डेगॉन्ग ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग ने अमेरिका की रेटिंग को नेगेटिव कर दिया है। जानकार मानते हैं कि इससे चीन द्वारा खरीदे जाने वाले अमेरिकी बॉन्ड में कमी आएगी, जिससे अमेरिका की कर्ज लेने की क्षमता घटेगी।
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