पाकिस्‍तान को एफ-16 की खेप देगा अमेरिका लेकिन छीनेगा सौ परमाणु बम

वाशिंगटन. अमेरिका और पाकिस्‍तान में एक बार फिर तलवारें खिंच सकती हैं। और, इस बार का झगड़ा शायद सबसे गंभीर हो। कारण, पाकिस्‍तान के परमाणु बमों पर अमेरिका की नजर है। उसके पास करीब 100 परमाणु बम बताए जाते हैं। ये सभी अमेरिका अपने कब्‍जे में ले सकता है। यही नहीं, पाकिस्‍तान को नए परमाणु बम बनाने से रोकने की भी अमेरिका ने ठान ली हे। इसके लिए उसे बाकी मुल्‍कों का भी साथ हासिल है। इसलिए पाकिस्‍तान के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।

अमेरिका पाकिस्‍तान को एक ओर परमाणु बम रोकने का मन बना है वहीं दूसरी ओर उसकी लड़ाकू एफ-16 विमानों के बेड़े की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। पाकिस्‍तानी न्‍यूज एजेंसी एपीपी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने एफ-16 विमान बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन को 42.3 मिलियर डॉलर का ठेका दिया है। इसके तहत पाकिस्‍तान को एफ-16 विमानों के लिए 10 अतिरिक्ति अपग्रेड किट मुहैया कराए जाएंगे।
अमेरिकी मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक अगले महीने न्‍यूयॉर्क में होने वाले संयुक्‍त राष्‍ट्र की सालाना बैठक में पाकिस्‍तान को नए परमाणु बम बनाने से रोकने का मुद्दा उठेगा। अमेरिका को चार परमाणु शक्तियों का समर्थन प्राप्‍त है। इसलिए उसे अपना प्रस्‍ताव पारित कराने में मुश्किल नहीं आनी चाहिए।
अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी न्‍यूज ने यह खबर भी दी है कि अमेरिका इस बात की भी तैयारी कर रहा है कि अगर जरूरत पड़े तो पाकिस्‍तान के सौ परमाणु बम वह अपने कब्‍जे में कर ले। इसके लिए यह तर्क दिया जाएगा कि पाकिस्‍तान के परमाणु बम गलत हाथों में पड़ने का खतरा है। लेकिन पाकिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्‍तान और अमेरिका के बीच 'पूरी तरह लड़ाई' छिड़ जाएगी।
अमेरिका के कई मौजूदा और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि 9/11 से पहले से ही पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा अमेरिका की सुरक्षा नीति की प्राथमिकता रही है। इन अफसरों के मुताबिक अमेरिका ने पाकिस्तान के बमों के गलत हाथ में जाने की आशंका को दूर करने के लिए 'गुप्त योजना' तैयार कर ली है।
लेकिन पाकिस्तान और अमेरिका के बीच नए मतभेद की ज़मीन अमेरिका की बम छीनने की योजना नहीं तैयार करेगी। बल्कि इसके लिए अमेरिका की वह नीति जिम्मेदार हो सकती है जिसके तहत अमेरिका अन्य परमाणु ताकत संपन्न देशों के साथ पाकिस्तान पर दबाव बनाकर फिसाइल मैटेरियल कट ऑफ ट्रीटी नाम का ऐसा समझौता कराने जा रहा है जिसके तहत पाकिस्तान को परमाणु बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल की सप्लाई रोक दी जाएगी। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक इस काम में ओबामा प्रशासन को चीन ने भी समर्थन देने का फैसला किया है। पेरिस में हाल ही में हुई कॉन्फ्रेंस में रूस, फ्रांस, ब्रिटेन ने चीन की तरह अमेरिका की योजना का समर्थन किया है।
अमेरिका और उसके साझेदार देश सितंबर तक इस मामले में समझौते की उम्मीद कर रहे हैं और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र की सभा में जाकर फिसाइल मैटेरियल कट ऑफ ट्रीटी (एफएमसीटी) पर चर्चा की शुरुआत करने की योजना बनाई है।
अब तक पाकिस्तान ने एफएमसीटी से खुद को बचाने के लिए सभी तरह के अंतरराष्ट्रीय दबाव झेलता रहा है। पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि यूएन कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट (यूएनसीडी) के दायरे से बाहर अमेरिका के समर्थन वाली किसी भी डील का वह विरोध करेगा।
गौरतलब है कि जेनेवा में मौजूद यूएनसीडी निशस्त्रीकरण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, लेकिन यह ट्रिटी पिछले 12 सालों से रुकी हुई है क्योंकि पाकिस्तान इसका विरोध करता रहा है। अमेरिका के नए दांव के पीछे की रणनीति यही है कि एक ऐसा नया मंच तैयार हो जहां पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सके। अमेरिका की उप विदेश मंत्री एलेन टॉशर का कहना है कि एफएमसीटी पर हम यूएनसीडी के दायरे में ही सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे पाकिस्तान ने कई सालों से रोक रखा है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि रजा बशीर तरार ने संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में कहा था कि उनका देश ऐसी किसी भी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेगा और इस समझौते को लागू नहीं करेगा। अपने ऊपर बढ़ते दबाव से बचने के लिए पाकिस्तान, भारत और अमेरिका की तर्ज पर अमेरिका के साथ परमाणु संधि करने की नाकाम कोशिश कर चुका है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक अमेरिका के साथ समझौता करने से भारत के लिए परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत किए बिना परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में मान्यता मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

अमेरिका ने पाकिस्तान की समझौता करने की पेशकश को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि पाकिस्तान में डॉ. ए. क्यू. खान की अगुवाई में परमाणु बम बनाने की तकनीक कई देशों और संगठनों के साथ साझा करने की बात सामने आ चुकी है, जिसके चलते पाकिस्तान के साथ ऐसी संधि नहीं हो सकती है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के पास १०० से अधिक परमाणु हथियार बताए जाते हैं। पाकिस्तान दुनिया में सबसे तेजी से परमाणु हथियार बना रहा है। चीन के सहयोग से वह चश्मा में दो नए परमाणु प्लांट तैयार कर चुका है। इसके अलावा पाकिस्तान के अंदरूनी हालात इस बात की आशंका को जन्म देने के लिए काफी माने जा रहे हैं कि उसके परमाणु बम या उसकी तकनीक कभी भी तालिबान और अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों के हाथ में जा सकते हैं।
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